चित्रकूट के स्कूलों में मीडिया एंट्री पर नया ‘फरमान’, पहचान पत्र के नाम पर खड़े हुए सवाल

 

अश्विनी श्रीवास्तव

चित्रकूट। जिले के विद्यालयों में मीडिया कवरेज को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। ताजा निर्देशों के अनुसार अब बिना जिला सूचना अधिकारी द्वारा जारी पहचान पत्र के किसी भी मीडिया कर्मी को स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस आदेश ने न सिर्फ पत्रकारों के बीच असमंजस पैदा किया है, बल्कि इसकी वैधता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या इस तरह का कोई स्पष्ट शासनादेश वास्तव में मौजूद है, या फिर यह केवल एकतरफा निर्णय लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात यह भी है कि इस संबंध में खुद जिला सूचना कार्यालय की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई जा रही।

 

पत्रकारों का कहना है कि खबरें मौके पर बनती हैं, न कि सरकारी दफ्तरों की फाइलों में। यदि हर छोटी-बड़ी कवरेज के लिए पहले अनुमति लेने की बाध्यता होगी, तो इससे पत्रकारिता की मूल भावना ही प्रभावित होगी। यह व्यवस्था कम और सूचना के प्रवाह पर नियंत्रण की कोशिश अधिक नजर आती है।

 

मीडिया कर्मियों का तर्क है कि उनकी पहचान उनके कार्य और उनके संस्थान से होती है। किसी भी विद्यालय में प्रवेश के दौरान संबंधित प्रधानाध्यापक को परिचय देना सामान्य प्रक्रिया है। यदि किसी स्तर पर संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है, तो जिला प्रशासन, सूचना कार्यालय, डीएम या एसपी कार्यालय से सत्यापन कराया जा सकता है। लेकिन पहले से ही प्रवेश पर रोक लगा देना कई सवाल खड़े करता है।

 

शिक्षा संस्थानों को पारदर्शिता का केंद्र माना जाता है। ऐसे में वहां पर इस तरह की पाबंदियां लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत माना जा रहा है। यदि व्यवस्थाएं सही और पारदर्शी हैं, तो फिर इस तरह की बंदिशों की जरूरत क्यों पड़ रही है?

 

फिलहाल इस मुद्दे को लेकर जिले में चर्चा तेज हो गई है। पत्रकार संगठनों ने भी इस पर आपत्ति जताने के संकेत दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या यह ‘फरमान’ आगे भी लागू रहेगा या फिर इसे वापस लिया जाएगा।

 

कलम को रोका नहीं जा सकता — यह आवाज है, और आवाज उठती रहेगी।

Up Fight Times
Author: Up Fight Times

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