कौशाम्बी की सड़कों पर खाकी का ‘करुणा अवतार’, पुलिस की संवेदनशीलता देख भावुक हुए विदेशी पर्यटक।

 

संवाददाता निहाल शुक्ला

कौशाम्बी। जहां हजारों वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने समूची मानवता को करुणा, संयम और अहिंसा का अमर संदेश दिया था, आज उसी ऐतिहासिक कौशाम्बी की पावन धरती पर इंसानी जिंदगी को महफूज रखने का एक नया और अनूठा महायज्ञ चल रहा है। रफ्तार के फेर में उजड़ते सुहाग, सूनी होती मां की गोद और अनाथ होते मासूम बच्चों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत के निर्देशन में चल रहा 15 दिवसीय विशेष सड़क सुरक्षा अभियान अब महज एक सरकारी औपचारिकता या जुर्माना वसूली का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह एक “जनजीवन सुरक्षा आंदोलन” का रूप ले चुका है। जिले के चौराहों पर खड़ी खाकी सिर्फ चालान की पर्चियां नहीं काट रही, बल्कि बेपरवाह वाहन चालकों को यह एहसास दिला रही है कि हेलमेट और सीट बेल्ट कोई कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि उनके अपने हंसते-खेलते परिवार का अभेद्य सुरक्षा कवच है।

 

​शनिवार को विजिया चौराहे पर इस जन-आंदोलन का एक ऐसा मर्मस्पर्शी दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर शख्स के जज्बात को झकझोर कर रख दिया। बौद्ध पर्यटन स्थलों के दीदार के लिए आए कंबोडिया के विदेशी पर्यटक अचानक सड़क किनारे ठिठक गए। उन्होंने देखा कि तपती धूप और भीषण गर्मी के बीच मुस्तैद पुलिसकर्मी यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर डंडा नहीं चमका रहे, बल्कि हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर बड़ी ही मिन्नत के साथ उन्हें समझा रहे हैं कि आपकी जिंदगी आपके अपनों के लिए कितनी अनमोल है। जब भाषा की दीवार बीच में आई और विदेशी सैलानियों को हिंदी-अंग्रेजी समझने में दिक्कत हुई, तो तत्काल मौके पर बौद्ध भंते को बुलाया गया। भंते ने जब कंबोडियाई भाषा में पर्यटकों को कौशाम्बी पुलिस का यह मानवीय संदेश अनुवाद करके सुनाया, तो विदेशी मेहमान खाकी का यह रूप देखकर पूरी तरह भावुक हो गए।

 

​भंते के माध्यम से जब कंबोडियाई पर्यटकों तक यह बात पहुँची कि दोपहिया पर हेलमेट लगाना, चार पहिया में सीट बेल्ट बांधना, शराब के नशे और मोबाइल फोन से दूर रहकर ड्राइविंग करना तथा सड़क पर एम्बुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों को भगवान का दूत समझकर सबसे पहले रास्ता देना ही असली जीवन रक्षा है, तो उन्होंने खुले दिल से इस अनूठी पहल की सराहना की। विदेशी सैलानियों ने कहा कि उन्होंने दुनिया के तमाम विकसित देशों में ट्रैफिक मैनेजमेंट देखा है, लेकिन सड़क पर खड़ी पुलिस को इतनी संवेदनशीलता और अपनेपन के साथ लोगों के आगे हाथ जोड़ते पहली बार देखा है। पर्यटकों ने एक सुर में कहा कि कौशाम्बी पुलिस सिर्फ कानून का पालन नहीं करा रही, बल्कि लोगों के सुहाग और बूढ़े मां-बाप के बुढ़ापे की लाठी की रक्षा कर रही है।

 

​स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि कप्तान सत्यनारायण प्रजापत के आने के बाद ज़िले में पुलिस की कार्यशैली का पूरा नजरिया बदल चुका है। अब पुलिस का यह अभियान डंडे के दम पर वसूली का जरिया नहीं, बल्कि सीधे मानवीय संवाद पर आधारित है, यही वजह है कि कस्बों और गांवों में लोग अब खुद जिम्मेदारी समझते हुए हेलमेट पहनने लगे हैं। विजिया चौराहे पर थाना प्रभारी केके यादव, उप निरीक्षक चंद्रशेखर सिंह, जितेंद्र गौड़ और विष्णु कुमार पाल समेत पूरी पुलिस टीम लगातार लोगों को इस मुहिम से जोड़ती नजर आई, जिसने कौशाम्बी की सड़कों पर सुरक्षा का एक नया अध्याय लिख दिया। यह अद्भुत नजारा साफ गवाही दे रहा था कि जहां कभी बुद्ध ने आत्मा को तारने की राह दिखाई थी, वहीं आज कौशाम्बी पुलिस लोगों की काया और सांसों को बचाने का संकल्प पूरी शिद्दत से निभा रही है।

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Author: Up Fight Times

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