*नगर पंचायत धाता में किसानों का ‘रणघोष’: सिस्टम की बेरुखी पर बरसे अन्नदाता*
*भाकियू (टिकैत) ने घेरा कार्यालय, भीषण लू के बीच गूंजी प्रशासन विरोधी हुंकार; 10 दिन का अल्टीमेटम*
*अनुपम सिंह, यूपी फाइट टाइम्स*
*धाता (फतेहपुर):*
प्रशासनिक शिथिलता और जनसमस्याओं के अंबार से त्रस्त किसानों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। फतेहपुर जनपद के धाता नगर पंचायत कार्यालय में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के बैनर तले आयोजित महाधरने ने शासन-प्रशासन की चूलें हिला दीं। आसमान से बरसती आग और ४० डिग्री से ऊपर के तापमान के बावजूद सैकड़ों की संख्या में किसानों ने कार्यालय परिसर को ‘जनाक्रोश’ के केंद्र में तब्दील कर दिया।
*कोरे आश्वासनों की राजनीति अब नहीं चलेगी: किसान*
धरने की अध्यक्षता कर रहे नेताओं ने दो टूक कहा कि धाता क्षेत्र को समस्याओं के दलदल में धकेल दिया गया है। किसानों का आरोप है कि अधिकारी केवल एयर-कंडीशंड कमरों में बैठकर फाइलों पर विकास की इबारत लिख रहे हैं, जबकि धरातल पर सड़कें जर्जर हैं, हैंडपंप सूखे हैं और स्ट्रीट लाइटें शो-पीस बनी हुई हैं।
*इन 7 प्रमुख मुद्दों पर घेरा गया प्रशासन:*
*अतिक्रमण पर प्रहार:* वार्ड नंबर 7 तिलक नगर में वर्ष २०२४ से लंबित अवैध कब्जे के खिलाफ त्वरित बुलडोजर कार्रवाई की मांग।
*स्मार्ट मीटर का दंश:* उपभोक्ताओं का शोषण कर रहे स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाने की जिद।
*पर्यावरण की लूट:* धड़ल्ले से जारी अवैध वृक्ष कटान पर पूर्ण प्रतिबंध और दोषियों की गिरफ्तारी।
*कृषि बुनियादी ढांचा:* धाता में अविलंब गेहूं क्रय केंद्र की स्थापना ताकि किसानों को बिचौलियों से बचाया जा सके।
*नागरिक सुविधाएं:* जर्जर सड़कों का पुनरुद्धार और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों व हैंडपंपों का कायाकल्प।
*अधिकारियों की ‘अग्निपरीक्षा’, 10 दिन में समाधान का लिखित वादा*
किसानों के उग्र रुख और भारी नारेबाजी को देखते हुए स्थानीय प्रशासन रक्षात्मक मुद्रा में नजर आया। मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार अशोक कुमार कुशवाहा, बिजली विभाग के जेई अजय कुमार, और खागा सप्लाई इंस्पेक्टर हरीश कुमार साहनी ने किसानों को मनाने की पुरजोर कोशिश की। लंबी जद्दोजहद और तीखी बहस के बाद, अधिकारियों ने लिखित रूप से 10 कार्यदिवसों के भीतर समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।
*उग्र आंदोलन की चेतावनी*
ब्लॉक अध्यक्ष अशोक सिंह और जिला संयोजक महेश फौजी ने प्रशासन को सचेत करते हुए कहा कि, “यह केवल एक सांकेतिक धरना है। यदि 10 दिनों में बदलाव नहीं दिखा, तो किसान जेल भरो आंदोलन और नगर पंचायत के पूर्ण तालाबंदी की राह अपनाएंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।”
*शक्ति प्रदर्शन में मातृशक्ति का भी रहा बोलबाला*
इस महाधरने में केवल पुरुष किसान ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं। मुख्य रूप से गिरिजा शंकर मिश्रा, धर्म सिंह चौहान, जयकरण सिंह, गंगा सिंह, सचिन (मिस्त्री), राजू भटकयपुर, महेश पटेल (पचरौली), बुधराज, मोनू शर्मा के साथ मनोरमा देवी, गुड़िया देवी, रूपा देवी, सुनीता देवी, हीरामणि और लक्ष्मी देवी ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई।










