कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश की पुलिस अक्सर अपने कारनामों के लिए सुर्खियों में रहती है, लेकिन कौशाम्बी की पइन्सा पुलिस ने इस बार जो किया है, उसने कानून की किताबों को ही चुनौती दे दी है। यहाँ पुलिस ने एक गांजा तस्कर को पकड़ा और उससे बड़े ही रौब के साथ ‘गांजा रखने और बेचने का लाइसेंस’ मांग लिया। अब जब आरोपी वह कागज नहीं दिखा पाया (जो पूरे भारत में कहीं बनता ही नहीं), तो पुलिस ने बाकायदा फर्द में इसे उसकी गलती के तौर पर दर्ज भी कर दिया।
पूरा मामला पइन्सा थाना क्षेत्र के उदहिन बुजुर्ग गांव का है। यहाँ प्राइमरी स्कूल के सामने हृदय नारायण नाम का एक बुजुर्ग खुलेआम गांजा बेच रहा था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस और आबकारी की टीम ने छापा मारा और बुजुर्ग को 340 ग्राम गांजे के साथ रंगे हाथों दबोच लिया। गिरफ्तारी तक तो सब ठीक था, लेकिन असली खेल शुरू हुआ कागजी कार्यवाही के दौरान।
थाने में जब फर्द बरामदगी लिखी जाने लगी, तो पुलिस ने अपना ‘रटा-रटाया’ फॉर्मूला लगा दिया। पुलिस ने कागज पर काले अक्षरों में लिख दिया— “अभियुक्त से गांजा रखने और उसकी बिक्री का लाइसेंस तलब किया गया, जो वह प्रस्तुत नहीं कर सका।” यानी पुलिस को पूरी उम्मीद थी कि आरोपी अपनी जेब से गांजे का सरकारी परमिट निकालकर साहब के सामने पेश कर देगा। हद तो तब हो गई जब पता चला कि यहाँ की पुलिस सिर्फ गांजा ही नहीं, बल्कि पकड़े गए बदमाशों से चाकू और अवैध तमंचा रखने का भी लाइसेंस मांगती है और उसे फर्द में दर्ज भी करती है।
इस अजीबो-गरीब फर्द ने आबकारी विभाग के भी होश उड़ा दिए हैं। आबकारी निरीक्षक सुनील कुमार सिंह ने साफ किया कि भारत में गांजा पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसका कोई लाइसेंस जारी ही नहीं किया जाता। यहाँ तक कि भांग की दुकानों पर भी गांजा बेचना अपराध है। ऐसे में पुलिस ने ये लाइन क्यों लिखी, यह समझ से परे है।
दरअसल, यह पूरा मामला कौशाम्बी पुलिस की ‘कॉपी-पेस्ट’ वाली कार्यशैली को उजागर करता है। जांच अधिकारी अक्सर पुराने मामलों की फर्द से मैटर कॉपी करते हैं और बिना दिमाग लगाए उसे हर केस में फिट कर देते हैं। अब यूपी कॉप ऐप के जरिए यह FIR सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग पुलिस की इस ‘महान’ लिखापढ़ी पर जमकर चुटकी ले रहे हैं। आरोपी तो जेल चला गया, लेकिन पुलिस की इस ‘लाइसेंस वाली मांग’ ने पूरे महकमे की किरकिरी करा दी है।










