पति की लंबी आयु के लिए महिलाओं ने रखा व्रत

 

*वट वृक्ष की विधि विधान से पूजा कर अपने पति की लंबी आयु की कामना की*

 

*ब्यूरो चीफ बाराबंकी*

 

 

 

*अटूट प्रेम व समर्पण की कहानी**वट सावित्री व्रत* मद्र देश की राजकुमारी सावित्री और उनके पति सत्यवान के अटूट प्रेम व समर्पण की कहानी है।राजकुमारी सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म की शक्ति से यमराज को विवश कर सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या (उत्तर भारत) या पूर्णिमा को पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है।

 

राजकुमारी सावित्री ने राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपना पति चुना, जो वन में रहते थे। महर्षिनारद मुनि ने राजकुमारी सावित्री को बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष और बची है, परंतु राजकुमारी सावित्री ने उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया। विवाह के एक वर्ष बाद, जब सत्यवान की मृत्यु का समय आया, तो वे लकड़ियाँ काटते समय वटवृक्ष (बरगद) के नीचे मूर्छित होकर गिर गए। सत्यवान के प्राण लेने यमराज स्वयं आए। सावित्री यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। यमराज ने उन्हें वापस जाने को कहा, लेकिन सावित्री ने कहा कि जहाँ उनके पति रहेंगे वहीं रहेंगी। सावित्री ने यमराज से बातचीत में अपने ज्ञान, धर्म और पति के प्रति निष्ठा का परिचय दिया। सावित्री की बातों से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें वरदान मांगने को कहा।सावित्री ने पहले सास-ससुर की आँखें, ससुर का राज्य और अंत में स्वयं के लिए सौ पुत्रों का वरदान मांगा, जो सीधे तौर पर पति के जीवित होने का संकेत था। यमराज ने उन्हें ‘तथास्तु’ कह दिया।जब यमराज ने सत्यवान के प्राण छोड़ दिए, तो सावित्री लौटकर वटवृक्ष के नीचे आई, जहाँ सत्यवान जीवित हो उठे। इसी घटना के बाद से बरगद के वृक्ष की पूजा की परंपरा शुरू हुई। तब से लेकर आज तक सुहागिन स्त्रियां अपने पति के लिए इस निर्जला व्रत को रखती है तथा अपने पति के लंबी उम्र की कामना करती है।

Up Fight Times
Author: Up Fight Times

और पढ़ें
और पढ़ें