यूपीफाइट टाइम्स ब्यूरोचीफ लखनऊ
खनन की NOC गाटा संख्या 1290 व 1398 के लिए जारी।
लेकिन अवैध खनन गाटा संख्या 1391स में होरहाहै।
किसान पथ को तोड़ कर खनन वाहनो के लिए रास्ता बनाया गया है।
18,548 घन मीटर मिट्टी निकालने की अनुमति।
10 फुट से अधिक गहराई तक खुदाई की जारहीहो
खनन स्थल पर न बोर्ड, न सीमांकन।
शिकायत के बावजूद कार्यवाही नहीं होने का आरोप।
स्थानीय लोगों का आरोप लेखपाल कि मिली भगत है
लखनऊ के तहसील मलिहाबाद क्षेत्र में अवैध खनन के मामलों पर अंकुश लगता नहीं दिख रहा है।
थाना दुबग्गा क्षेत्र के मल्हा गांव में एक बार फिर खनन नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन से प्राप्त NOC की आड़ में अनुमति प्राप्त गाटा संख्याओं को छोड़कर दूसरे गाटा में बड़े पैमाने पर मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है।
उपलब्ध अनुमति पत्र के अनुसार SHREE ENTERPRISES को 16 जून 2026 से 24 जुलाई 2026 तक 18,548 घन मीटर साधारण मिट्टी निकालने की अनुमति गाटा संख्या 1290 (रकबा 0.2970 हेक्टेयर) तथा गाटा संख्या 1398 (रकबा 0.6090 हेक्टेयर) के लिए प्रदान की गई है।
*इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि वास्तविक खनन गाटा संख्या 1391स में किया जा रहा है, जो अनुमति में शामिल नहीं है।*
ग्रामीणों के अनुसार उक्त गाटा में 10 फुट से अधिक गहराई तक मिट्टी निकाली जा चुकी है।
किसान महेंद्र कुमार पुत्र बेचा लाल, विजय कुमार पुत्र बेचा लाल एवं अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी भूमि पर भी अवैध खनन किया जा रहा है।
उनका कहना है कि खनन स्थल पर न तो निर्धारित सूचना बोर्ड लगाया गया है और न ही अनुमति प्राप्त क्षेत्र का सीमांकन किया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि खनन किस भूमि पर किया जा रहा है।
NHAI द्वारा निर्मित लखनऊ किसान पथ को तोड़ कर मिट्टी डाल कर वाहनों को निकालने का रास्ता बनाया गया है
अगर आप आम इंसान है NHAI आपके खेत के सामने तार लगा कर हाईवे का रास्ता बंद कर देगी लेकिन खनन माफिया कहीं से भी हाईवे तोड़ मरोड़ कर रास्ता बना सकते है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई।
इतना ही नहीं, जांच के नाम पर वास्तविक स्थिति के विपरीत रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि खनन स्थलों का निरीक्षण राजस्व एवं खनन विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से किया जाता है।
यदि निरीक्षण लगातार हो रहा है, तो फिर अनुमति प्राप्त गाटों के बजाय किसी अन्य गाटा में कथित खनन कैसे जारी रहा? यदि शिकायतें पहले से थीं, तो समय रहते कार्यवाही क्यों नहीं की गई? यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है कि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन कर अन्य भूमि पर खनन किया गया, तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अनुमति के दुरुपयोग और निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
इस संबंध में जब क्षेत्रीय लेखपाल मनमीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि “अब तक इस तरह की कोई जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।”
*जबकि क्षेत्री लोगों का दावा है कि मनमीत सिंह लेखपाल की मिलीभगत से अवैध खनन किया गया है।*
वहीं ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग एवं राजस्व विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, राजस्व अभिलेखों एवं सीमांकन के आधार पर वास्तविक खनन स्थल का सत्यापन कराने, अवैध खनन तत्काल बंद कराने तथा दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने की मांग की है।
साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा मिलीभगत जांच में सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्यवाही की जाए।










