डीज़ल जनरेटरों की जगह बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली अपनाने से हर साल 11.87 लाख टन CO₂ उत्सर्जन घटाने का दावा
यूपी फ़ाइट टाइम्स
यमुनापार प्रयागराज । देश को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कानपुर को भारत का पहला “ग्रीन बैकअप पावर सिटी” बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। IIT रुड़की से शिक्षित इंजीनियर ई. विनोद कुमार गंगवार ने एक तकनीकी प्रस्ताव जारी करते हुए कहा है कि यदि शहर में डीज़ल जनरेटरों (DG Set) के स्थान पर चरणबद्ध तरीके से लिथियम-आयन बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage System-BESS) अपनाई जाए, तो प्रतिवर्ष लगभग 11.87 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है।
प्रस्ताव के अनुसार, कानपुर में वर्तमान में 5 kVA से 1000 kVA क्षमता तक के लगभग 39 हजार डीज़ल जनरेटर संचालित हैं। यदि ये प्रतिदिन औसतन दो घंटे भी चलते हैं, तो सालभर में करीब 4.43 लाख किलोलीटर डीज़ल की खपत होती है। इससे भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), सल्फर ऑक्साइड (SOx), सूक्ष्म कण (PM) तथा ध्वनि प्रदूषण भी फैलता है।
ई. गंगवार का कहना है कि आधुनिक बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) डीज़ल जनरेटर का विश्वसनीय, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त विकल्प बन चुकी है। यह प्रणाली बिना डीज़ल जलाए तत्काल बैकअप बिजली उपलब्ध कराती है, रखरखाव की लागत कम होती है और इसे रूफटॉप सोलर संयंत्रों के साथ जोड़कर स्वच्छ ऊर्जा आधारित मॉडल विकसित किया जा सकता है।
प्रस्ताव में दावा किया गया है कि डीज़ल जनरेटरों के स्थान पर बैटरी प्रणाली अपनाने से प्रतिवर्ष 4.43 लाख किलोलीटर डीज़ल की बचत, 11.87 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण में उल्लेखनीय गिरावट और ईंधन व रखरखाव पर हजारों करोड़ रुपये की संभावित बचत हो सकती है। प्रारंभिक निवेश की भरपाई सामान्यतः तीन से चार वर्षों में होने तथा इसके बाद 10 से 15 वर्षों तक कम लागत पर विश्वसनीय बैकअप बिजली मिलने की संभावना भी जताई गई है।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी के आधार पर कार्बन क्रेडिट योजनाओं से जुड़कर प्रतिवर्ष करीब 200 से 400 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त राजस्व अर्जित किया जा सकता है, हालांकि यह राशि कार्बन बाज़ार की प्रचलित दरों पर निर्भर करेगी।
इंजीनियर विनोद कुमार गंगवार ने राज्य सरकार से “ग्रीन बैकअप पावर मिशन” शुरू करने की मांग की है। इसके तहत डीज़ल जनरेटरों का चरणबद्ध प्रतिस्थापन, बैटरी प्रणालियों पर पूंजीगत अनुदान एवं कर प्रोत्साहन, रूफटॉप सोलर के साथ एकीकरण, डीज़ल जनरेटरों के नियमित उपयोग को हतोत्साहित करने तथा बैटरी निर्माण व रीसाइक्लिंग उद्योग को बढ़ावा देने जैसे सुझाव दिए गए हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि यह पहल लागू होती है तो कानपुर स्वच्छ ऊर्जा आधारित बैकअप व्यवस्था अपनाने वाला देश का अग्रणी शहर बन सकता है और यह मॉडल आगे चलकर उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य महानगरों में भी अपनाया जा सकता है।










