पाठा क्षेत्र में कूप निर्माण में बड़ा घोटाला!मानक विहीन निर्माण
– जेई-ठेकेदारों की मिलीभगत से धड़ल्ले से भुगतान,जांच की उठी मांग
अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। जनपद के मानिकपुर तहसील के पाठा क्षेत्र में लघु सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कूप निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से मानक विहीन और अधूरे कूपों का निर्माण कर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। मामले में जिलाधिकारी से जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता वरिष्ठ समाजसेवी सीताराम बड़गैया (निवासी ग्राम दुधवनिया चंद्रामारा, मानिकपुर) ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि कूपों की खुदाई में निर्धारित गहराई और चौड़ाई का पालन नहीं किया जा रहा है। निर्माण में गुणवत्ताहीन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। बंधाई के लिए केसर डस्ट का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे कई कूप कुछ ही महीनों में ध्वस्त हो गए हैं।
शिकायत में उदाहरण देते हुए बताया गया है कि निही चरैया गांव में लाभार्थी किसान वेंकटेश्वर दत्त पाण्डेय के खेत में हाल ही में निर्मित कूप कुछ माह के भीतर ही धराशायी हो गया। ध्वस्त कूप की फोटो भी शिकायत पत्र के साथ संलग्न की गई है। आरोप है कि अधूरा और मानक विहीन कार्य होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने भुगतान कर दिया।
मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है। शिकायत के अनुसार डोंडामाफी, अमचूर नेरुआ, छेरिहाखुर्द, टिकरिया, इंटवा डुडैला, बंभिया, ऊँचाडीह, निही चरैया, चुरेह कसेरुआ, मऊ गुरदारी और करौहा सहित अनेक ग्राम पंचायतों में इसी प्रकार के निर्माण कार्य कराए गए हैं।
आरोप है कि मानिकपुर में तैनात जेई एमआई व अन्य जूनियर अभियंताओं की मिलीभगत से नियम विरुद्ध तरीके से भुगतान किया जा रहा है। भोले-भाले किसानों को बहला-फुसलाकर कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं।
पाठा क्षेत्र जैसे पिछड़े इलाके में किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए बनाए जा रहे कूपों में अनियमितताओं के आरोपों ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो यह किसानों के साथ धोखा और सरकारी धन की खुली लूट मानी जाएगी।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने तथा सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या रुख अपनाता है और पाठा क्षेत्र के किसानों को कब तक न्याय मिल पाता है।









