​कौशाम्बी: जमुनापुर घाट पर यमुना का ‘कत्लेआम’, माफिया की मशीनों ने छलनी किया नदी का सीना, प्रशासन बेखबर!

(संवाददाता निहाल शुक्ला)

कौशाम्बी के जमुनापुर घाट पर इन दिनों जो मंजर है, उसे देखकर साफ लगता है कि यहाँ नियम-कायदे सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं। बालू माफिया ने विकास के नाम पर विनाश का वो तांडव मचा रखा है कि यमुना का सीना छलनी हो चुका है और जिम्मेदार तंत्र गहरी नींद में सोया है।

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो इस बात के पुख्ता गवाह हैं कि कैसे एनजीटी (NGT) के सख्त आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नदी की जलधारा के बीचों-बीच उतरी भारी पोकलैंड मशीनें और कतार में खड़े ओवरलोड डंपरों का काफिला चीख-चीख कर कह रहा है कि यहाँ माफिया को न तो कानून का खौफ है और न ही पर्यावरणीय विनाश का डर। जबकि नियमों के मुताबिक, नदी के प्रवाह क्षेत्र में भारी मशीनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।

*​सवालों के घेरे में जिम्मेदार तंत्र।*

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सब कुछ दिन के उजाले में और कैमरों की नजर में हो रहा है, तो प्रशासनिक अमला इस कदर बेखबर कैसे है? क्या भारी मशीनों की गड़गड़ाहट और सैकड़ों डंपरों की आवाजाही उन तक नहीं पहुँच रही? यह चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। खनन नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह से नदी के कछार और जलधारा से छेड़छाड़ की जा रही है, वह आने वाले समय में बड़ी तबाही का संकेत है।

​यमुना का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होने से न केवल जलस्तर नीचे जा रहा है, बल्कि आने वाले मानसून में बाढ़ और भीषण कटान का खतरा भी बढ़ गया है। यह केवल बालू का उत्खनन नहीं, बल्कि कौशाम्बी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अगर समय रहते इन बेखौफ मशीनों पर लगाम नहीं कसी गई, तो कौशाम्बी की लाइफलाइन कही जाने वाली यमुना का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

Up Fight Times
Author: Up Fight Times

और पढ़ें
और पढ़ें