*बदहाली: मालवा के अलीपुर, पांच साल से विकास के नाम पर ‘खानापूर्ति’*
बिंदकी /फतेहपुर मलवा ब्लॉक के कुछ गांव ऐसे हैं जहां विकास पर खाना पूर्ति हो गई
एक तरफ सरकार ‘कायाकल्प’ योजना के जरिए स्कूलों की सूरत बदलने का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ मलवा ब्लॉक का अलीपुर गांव सिस्टम के भ्रष्टाचार की गवाही दे रहा है। गांव के प्राथमिक विद्यालय को जाने वाला रास्ता पिछले पांच साल से दलदल में तब्दील है। मासूम बच्चे हर दिन इसी कीचड़ में सने पैरों के साथ ‘भविष्य’ संवारने स्कूल जाने को मजबूर हैं सूत्रों की माने तो विकास के नाम पर आने वाला बजट जिम्मेदारों की वह उनके हितेशियों की जेब में जा रहा है और ग्रामीण नरकीय जीवन जी रहे हैं।
*10 हजार की आबादी, फिर भी विकास को तरसे*
ग्राम पंचायत विशनामाऊ और अलीपुर को मिलाकर करीब 10 हजार की विशाल जनसंख्या और 3000 वोटिंग होने के बावजूद यह इलाका उपेक्षित है। ग्रामीणों का कहना है कि पांच साल बीत गए, लेकिन इंटरलॉकिंग या डामर रोड पक्की सड़क के नाम पर सिर्फ कागजों पर घोड़े दौड़ाए गए। भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जिम्मेदार विकास की मलाई बांट रहे हैं और जनता कीचड़ में लथपथ हो रही है।
*कीचड़ पार कर स्कूल पहुंच रहे 40 बच्चे*
अलीपुर प्राथमिक विद्यालय में किरण यादव (प्रधानाध्यापिका) व ग्रामीण दिनेश, आजम, शिवसागर और शिक्षा मित्र सुनीता की टीम तैनात है। स्कूल में कुल 53 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से करीब 40 बच्चे रोजाना स्कूल आते हैं। इन मासूमों के लिए स्कूल का सफर किसी जंग से कम नहीं है। कई बार बच्चे कीचड़ में फिसलकर चोटिल हो जाते हैं और उनकी वर्दी खराब हो जाती है।
*अफसरों की ‘मलाई’ और जनता का दर्द*
कुछ ग्रामीण सूत्रों ने दो टूक कहा कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई है। गांव में जल निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। नाली न होने से घरों का पानी सड़कों पर जमा रहता है, जिससे रास्ता तालाब बन चुका है। ग्रामीणों ने मीडिया के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रास्ता दुरुस्त न हुआ, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव करेंगे।









