फतेहपुर में गुटखा सिंडिकेट का ‘खुला खेल’: ₹165 का पैकेट ₹220 में पार, प्रिंट रेट को ठेंगा दिखा रहे मुनाफाखोर

​फतेहपुर। जनपद में इन दिनों पान-मसाला और गुटखा के शौकीनों की जेब पर सरेआम डाका डाला जा रहा है। आलम यह है कि शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक दुकानदार प्रिंट रेट (MRP) की धज्जियां उड़ाते हुए मनमाने दाम वसूल रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जिले में एक सोची-समझी रणनीति के तहत कृत्रिम किल्लत पैदा कर कालाबाजारी का खेल खेला जा रहा है। बाजार में चर्चा है कि तंबाकू उत्पादों पर भारी जीएसटी बढ़ने वाली है और इसी अफवाह को ढाल बनाकर बड़े थोक व्यापारियों ने माल दबा लिया है। ग्राहकों का कहना है कि जिस गुटखा पाउच पर ₹165 का प्रिंट रेट दर्ज है, उसे ₹200 से ₹220 तक में बेचा जा रहा है, वहीं अन्य ब्रांडों के दामों में भी रातों-रात ₹30 से ₹50 की बढ़ोतरी कर दी गई है। ग्राउंड जीरो पर पड़ताल करने पर फुटकर दुकानदारों का तर्क है कि उन्हें मंडी से ही माल ऊंचे रेट पर मिल रहा है, जिससे वे मजबूरी में महंगे दामों पर बिक्री कर रहे हैं। बिना पक्की रसीद के माल खपाया जा रहा है, जिससे न केवल आम आदमी लुट रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी चूना लग रहा है। हैरत की बात यह है कि जिले के कोने-कोने से शिकायतें आने के बावजूद संबंधित विभाग कुंभकर्णी नींद सो रहा है। विधिक मापविज्ञान विभाग और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की चुप्पी से कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आखिर प्रशासन इन पर नकेल क्यों नहीं कस रहा? बाजार में मची इस अराजकता को लेकर आम जनता में जबरदस्त आक्रोश है और लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने जल्द ही छापेमारी कर रेट कंट्रोल नहीं किए, तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘सिंडिकेट’ को तोड़ पाता है या उपभोक्ताओं की जेब यूं ही कटती रहेगी।

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Author: Up Fight Times

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