– जनता की जेब पर डाका
अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। एक समय था जब बुंदेलखंड के बीहड़ों में डकैत जंगलों में छिपकर वारदात करते थे और पुलिस से बचते फिरते थे। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। डकैती का तरीका भले बदल गया हो, मगर जनता की जेब कटने की शिकायतें आज भी खत्म नहीं हुई हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह “लूट” खुले बाजार में हो रही है। शहर के कुछ थोक व्यापारी गुटका और सिगरेट जैसे उत्पादों को प्रिंट मूल्य (एमआरपी) से अधिक दाम पर बेचकर उपभोक्ताओं से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं।
– खुलेआम एमआरपी से ज्यादा वसूली
शहर के कई बाजारों में गुटका और सिगरेट के पैकेटों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। खुदरा दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ही थोक बाजार से अधिक कीमत पर माल दिया जाता है, जिसके कारण उन्हें भी मजबूरन ग्राहकों से ज्यादा पैसे लेने पड़ते हैं। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।
– जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह खुली मनमानी किसके संरक्षण में चल रही है। उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी बाजार में एमआरपी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की होती है। बावजूद इसके, शहर में इस तरह की वसूली पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित अधिकारी इस मामले में आंखें मूंदे बैठे हैं, या फिर व्यापारी तंत्र के दबाव के आगे प्रशासनिक व्यवस्था बेबस हो चुकी है।
– उपभोक्ताओं में बढ़ रहा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब हर उत्पाद पर एमआरपी स्पष्ट रूप से अंकित है, तो उससे अधिक कीमत वसूलना सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद अगर बाजार में यह खुलेआम जारी है, तो यह उपभोक्ता अधिकारों की अनदेखी है। कई उपभोक्ताओं ने प्रशासन से इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन से सख्ती की उम्मीद
यदि समय रहते इस समस्या पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो महंगाई के नाम पर सरकार की छवि भी प्रभावित हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन सक्रिय होकर बाजार की जांच करे और एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वाले थोक और खुदरा व्यापारियों पर कड़ी कार्रवाई करे। तभी बाजार में कानून का राज स्थापित होगा और मनमानी पर लगाम लग सकेगी।









