कौशाम्बी। जनपद की सैनी थाना पुलिस ने आज एक ऐसे शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह को बेनकाब किया है जो बैंक से पैसे निकालकर निकलने वाले मासूम और बुजुर्ग लोगों को अपनी ‘हाथ की सफाई’ का शिकार बनाता था। पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार के कुशल निर्देशन में काम कर रही पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज और सटीक मुखबिरी के आधार पर कानपुर और फतेहपुर निवासी तीन अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 20,000 रुपये नकद और ठगी में इस्तेमाल होने वाली कागजी नोटों की गड्डियां बरामद की हैं। पकड़े गए इन ठगों का आपराधिक इतिहास इतना लंबा है कि इनके नाम से ही कई जिलों की पुलिस कांपती थी।
ठगी की इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब सिराथू के अमृत लाल और बदलेपुर की सविता देवी ने सैनी थाने में अपनी आपबीती सुनाई। किसी से रास्ता पूछने के बहाने तो किसी को ‘जल्दबाजी में दिल्ली जाने’ का झांसा देकर इन शातिरों ने बैंक से निकले असली नोटों के बदले कागजों के बंडल थमा दिए थे। पूछताछ में अभियुक्तों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उनके गिरोह में पांच लोग शामिल हैं, जिनमें से कुछ बैंक के अंदर रेकी करते हैं और कम पढ़े-लिखे या सीधे-साधे लोगों को चिन्हित करते हैं। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य बाहर आकर मदद के बहाने उनका विश्वास जीतते थे और ऊपर-नीचे असली नोट लगी हुई अखबारी कागज की गड्डी देकर उनके असली पैसे लेकर रफूचक्कर हो जाते थे। इस गिरोह ने न केवल कौशाम्बी बल्कि बांदा के नरैनी इलाके में भी इसी तरह की बड़ी वारदात को अंजाम दिया था।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कानपुर नगर निवासी राजा सोनकर सबसे शातिर है, जिस पर प्रदेश के विभिन्न थानों में चोरी, लूट और गैंगस्टर एक्ट के 19 संगीन मामले दर्ज हैं। वहीं फतेहपुर निवासी दिपू उर्फ साजन पर 16 मुकदमे और वीरेंद्र पर लूट व आर्म्स एक्ट के 6 मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। पुलिस की इस कार्रवाई में टप्पेबाजी के पैसों के साथ-साथ अपराध में प्रयुक्त सामग्री भी बरामद हुई है। सैनी पुलिस की इस बड़ी कामयाबी ने ठगों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिससे जनपद के खाताधारकों ने बड़ी राहत की सांस ली है। पकड़े गए तीनों अभियुक्तों को विधिक कार्यवाही के बाद माननीय न्यायालय के समक्ष पेश कर जेल भेज दिया गया है।









