अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। जिले के खनिज कारोबार की चकाचौंध पर आखिरकार जांच एजेंसियों की नजर पड़ ही गई। शहर के चर्चित व्यापारी एमपी जायसवाल के ‘व्हाइट हाउस’ नाम से मशहूर भवन में आयकर और ईडी की संयुक्त विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शुक्रवार को ताबड़तोड़ छापेमारी की। करीब सात घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान टीम ने क्रशर मशीनों और खदानों से जुड़े कई दस्तावेजों की गहन जांच की।
सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों की टीम सुबह अचानक शहर पहुंची और सीधे एमपी जायसवाल के आवास और कार्यालय परिसर में दाखिल हो गई। इसके बाद पूरे परिसर को घेरकर दस्तावेजों की जांच शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान क्रशर कारोबार, खदान संचालन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कागजातों की बारीकी से पड़ताल की गई।
बताया जा रहा है कि जांच टीम कई अहम दस्तावेज अपने साथ लेकर रवाना हुई है। वहीं छापेमारी के दौरान लगभग 1.60 लाख रुपये नकद बरामद होने की भी चर्चा है। हालांकि अधिकारियों की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इस एक कार्रवाई ने ही जिले की क्रशर मंडी और खनिज कारोबारियों के बीच खलबली मचा दी है। खनन से जुड़े कारोबारी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। कई लोग इसे खनिज कारोबार में बड़े स्तर पर शुरू होने वाली जांच का संकेत मान रहे हैं।
दरअसल, चित्रकूट क्षेत्र में पत्थर और खनिज कारोबार लंबे समय से तेजी से फैलता रहा है। क्रशर मशीनों और खदानों के जरिए बड़े पैमाने पर पत्थर का खनन और कारोबार होता रहा है। ऐसे में जांच एजेंसियों की यह कार्रवाई कई नए सवाल खड़े कर रही है।
अब चर्चा इस बात की है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यापारी तक सीमित रहेगी या फिर खनिज कारोबार से जुड़े पूरे नेटवर्क की परतें खुलने वाली हैं।
चित्रकूट की धरती से निकला पत्थर आखिर किन-किन लोगों को पत्थर से सोना बनाने की ताकत दे गया, इसका जवाब अब जांच एजेंसियों की फाइलों में तलाशा जाएगा।









