*नर्गिस ख़ान*
नालासोपारा: शहर के सुबोध नगर इलाके में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां आवारा कुत्ते की खरोंच से संक्रमित हुई 9 वर्षीय बच्ची की रेबीज के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। करीब छह महीने पहले बच्ची को एक आवारा कुत्ते ने हल्की खरोंच दी थी। उस समय चोट गंभीर नहीं लगने के कारण परिवार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और पूरा एंटी-रेबीज उपचार नहीं कराया। कुछ दिन पहले बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसने खाना-पीना छोड़ दिया, आंखें लाल हो गईं और असामान्य व्यवहार दिखाई देने लगा। स्थिति बिगड़ने पर उसे पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
लापरवाही पड़ी भारी:
डॉक्टरों के अनुसार, रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो कुत्ते के काटने के अलावा खरोंच या लार के संपर्क से भी फैल सकती है। समय पर टीकाकरण न होने पर यह लगभग हमेशा घातक साबित होती है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर:
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। बच्ची के संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है और इलाके में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है। साथ ही, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टरों की सलाह:
विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। तुरंत घाव को साबुन-पानी से धोकर नजदीकी अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स जरूर लें। यह घटना एक कड़ी चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
नर्गिस खान:
नालासोपारा: शहर के सुबोध नगर इलाके में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां आवारा कुत्ते की खरोंच से संक्रमित हुई 9 वर्षीय बच्ची की रेबीज के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। करीब छह महीने पहले बच्ची को एक आवारा कुत्ते ने हल्की खरोंच दी थी। उस समय चोट गंभीर नहीं लगने के कारण परिवार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और पूरा एंटी-रेबीज उपचार नहीं कराया। कुछ दिन पहले बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसने खाना-पीना छोड़ दिया, आंखें लाल हो गईं और असामान्य व्यवहार दिखाई देने लगा। स्थिति बिगड़ने पर उसे पहले स्थानीय अस्पताल और बाद में मुंबई के कस्तूरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
लापरवाही पड़ी भारी:
डॉक्टरों के अनुसार, रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो कुत्ते के काटने के अलावा खरोंच या लार के संपर्क से भी फैल सकती है। समय पर टीकाकरण न होने पर यह लगभग हमेशा घातक साबित होती है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर:
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। बच्ची के संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है और इलाके में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है। साथ ही, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टरों की सलाह:
विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर इसे बिल्कुल भी हल्के में न लें। तुरंत घाव को साबुन-पानी से धोकर नजदीकी अस्पताल में जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन का पूरा कोर्स जरूर लें। यह घटना एक कड़ी चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।









