अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही स्ववित्तपोषित विद्यालयों की मनमानी पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभिभावक को किताब, ड्रेस, जूता-मोजा जैसी सामग्री निर्धारित दुकानों से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
डीएम ने बताया कि अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के 25 मार्च 2026 के पत्र के क्रम में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 और इसके संशोधन अधिनियम 2020 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष अभिभावकों द्वारा अधिक शुल्क वसूली और जबरन खरीद को लेकर शिकायतें मिलती हैं, जिसे गंभीरता से लिया गया है।
जिलाधिकारी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी विद्यालय के प्रधानाचार्य या प्रबंधन द्वारा किसी विशेष दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है, तो वे तुरंत शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए मोबाइल नंबर 9454457411 जारी किया गया है।
इसके अलावा, अभिभावक सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे के बीच कलेक्ट्रेट कार्यालय में लिखित शिकायत भी दे सकते हैं।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहली बार दोषी पाए जाने पर 1 लाख रुपये तक जुर्माना
दूसरी बार पर 5 लाख रुपये तक जुर्माना
तीसरी बार पर विद्यालय की मान्यता/संबद्धता समाप्त करने की कार्रवाई
शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक में जिले के सभी स्ववित्तपोषित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि शासनादेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा कठोर कार्रवाई तय है।
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने दोहराया कि प्रशासन का उद्देश्य अभिभावकों को राहत देना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है, जिससे किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण न हो सके।









