*फतेहपुर: दोस्ती की ऐसी मिसाल जिसे देख दुनिया रो पड़ी; दोस्त की मौत के गम में हमजा ने भी तोड़ा दम*

*​एक ही दिन में उजड़ गए दो घर: सड़क हादसे में आयुष की गई जान, तो जिगरी दोस्त हमजा ने सदमे में लगा ली फांसी; खखरेरू में मातम*

 

*​अनुपम सिंह | यूपी फाइट टाइम्स*

 

*​खखरेरू (फतेहपुर):*

 

कहते हैं दोस्ती में ‘एक जान और दो जिस्म’ का मुहावरा अक्सर पुरानी कहानियों में सुना जाता है, लेकिन जनपद फतेहपुर के खखरेरू क्षेत्र में बुधवार को इस मुहावरे ने एक ऐसी दर्दनाक हकीकत अख्तियार कर ली, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक सड़क हादसे में 13 वर्षीय आयुष की मौत के कुछ ही घंटों के भीतर, उसके सबसे अभिन्न मित्र मोहम्मद हमजा ने भी मौत को गले लगा लिया। दोनों की इस विदा ने साबित कर दिया कि उनकी दोस्ती महज़ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी रूहें भी एक-दूसरे से जुड़ी थीं।

 

*​सड़क हादसे ने छीना ‘आयुष’*

 

​घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार दोपहर को हुई, जब चकिया-बैरी मार्ग पर गुरु हेल्थ पॉली क्लीनिक के समीप एक अनियंत्रित तेज रफ्तार स्कूल बस ने साइकिल सवार आयुष कुमार (पुत्र शंकरलाल, निवासी बैरी) को जोरदार टक्कर मार दी। चश्मदीदों के मुताबिक हादसा इतना भीषण था कि आयुष बस के पहियों के नीचे फंस गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार एक अन्य युवक शिवम उर्फ शालू यादव भी गंभीर रूप से घायल हो गया।

 

*​दोस्त के बिना जीने की कल्पना नहीं कर सका हमजा*

 

​आयुष की मौत की खबर जैसे ही उसके स्कूल ‘सरस्वती ज्ञान मंदिर’ और उसके मित्रों तक पहुंची, मातम पसर गया। लेकिन इस खबर का सबसे गहरा प्रहार गांधीनगर निवासी मोहम्मद हमजा (13) पर हुआ। आयुष और हमजा कक्षा 8 के छात्र थे और उनकी दोस्ती पूरे स्कूल में मशहूर थी। शिक्षकों के अनुसार, दोनों का उठना-बैठना, खेलना और पढ़ना साथ ही होता था।

​परिजनों ने बताया कि आयुष की मौत की खबर सुनते ही हमजा सुध-बुध खो बैठा। वह लगातार रोता रहा और गुमसुम हो गया। घरवालों ने उसे ढांढस बंधाने की कोशिश की, लेकिन दोस्त के बिछड़ने का गम उस मासूम के दिल पर इतना गहरा लगा कि उसने कमरे में जाकर फांसी लगा ली। जब तक परिजन कुछ समझ पाते, हमजा अपने दोस्त के पीछे इस दुनिया से विदा हो चुका था।

 

*​पूरे इलाके में गमगीन सन्नाटा*

 

​एक ही दिन में दो किशोरों की मौत से खखरेरू क्षेत्र में कोहराम मचा हुआ है। जिसने भी सुना कि आयुष के पीछे हमजा ने भी जान दे दी, उसकी आंखें छलक आईं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने ऐसी ‘दीवानगी वाली दोस्ती’ पहले कभी नहीं देखी।

 

*​”वे सिर्फ दोस्त नहीं थे, एक-दूसरे की परछाई थे। स्कूल में भी उन्हें कभी अलग नहीं देखा गया। आज स्कूल का हर कोना और हर छात्र रो रहा है।”*

 

— एक शिक्षक, सरस्वती ज्ञान मंदिर

 

*​पुलिसिया कार्रवाई*

 

​पुलिस ने आयुष की मौत के मामले में स्कूल बस को कब्जे में लेकर चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं हमजा की मौत के बाद पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी की। दोनों परिवारों में इस समय चीख-पुकार मची है और गांव के हर घर में चूल्हा तक नहीं जला है।

Up Fight Times
Author: Up Fight Times

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