धनंजय पांडेय
आज का दिन हमें उस महान युगपुरुष के विचारों को स्मरण करने का अवसर देता है, जिन्होंने अपने ज्ञान, संघर्ष और संकल्प के बल पर भारत को एक नई दिशा दी — डॉ. भीमराव अंबेडकर। उन्होंने न केवल समाज में व्याप्त अन्याय और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि एक ऐसे राष्ट्र की नींव रखी जहाँ न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सर्वोपरि हो।
बाबा साहब का जीवन हमें यह सिखाता है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, शिक्षा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर बदलाव संभव है। उनका सपना था एक ऐसा भारत जहाँ किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग या लिंग के आधार पर भेदभाव न हो। आज भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे।
इस अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम संविधान के मूल्यों की रक्षा करेंगे, समाज में आपसी भाईचारा और समानता को बढ़ावा देंगे, तथा शिक्षा को हर घर तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे। यही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मैं देश के युवाओं से विशेष रूप से आग्रह करता हूँ कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें और एक जागरूक नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जो बाबा साहब के सपनों का भारत हो।
शिव दयाल (Social Activist)









