मो.फिरोज प्रयागराज / नारीबारी।नबी-ए-पाक ﷺ से बेइंतिहा मोहब्बत और अकीदत की मिसाल पेश करते हुए तेलंगाना के जिला आदिलाबाद निवासी नवयुवक हाजी आशिफ अंसारी एक बार फिर आस्था की कठिन परीक्षा पर निकल पड़े हैं। वर्ष 2023 में पैदल हज यात्रा पूरी करने वाले हाजी आशिफ अंसारी जनवरी 2026 से अपने घर से पैदल चलकर सऊदी अरब रवाना हुए हैं, जहां वे नबी-ए-पाक ﷺ के रोज़े का दीदार कर उमरा अदा करेंगे।
हाजी आशिफ अंसारी अपने कंधों पर भारी भरकम बैग लादे हुए हैं, जिसमें उनके कपड़े, जरूरी सामान और यात्रा से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। हजारों किलोमीटर की इस दुर्गम पैदल यात्रा के बावजूद उनके हौसले और जज़्बे में कोई कमी नहीं दिख रही है।इसी क्रम में मध्य प्रदेश की सीमा स्थित जिला रीवा के अंतिम पड़ाव सोहागी में 2 फरवरी 2026 की रात स्थानीय लोगों—रहीम मंसूरी समेत अन्य समाजसेवियों—ने उनके ठहरने और भोजन की मुकम्मल व्यवस्था की। 3 फरवरी की सुबह करीब 6 बजे उन्होंने पुनः अपनी यात्रा आरंभ की।
सुबह लगभग साढ़े नौ बजे जैसे ही हाजी आशिफ अंसारी मध्य प्रदेश की सीमा पार कर नारीबारी बाजार पहुंचे, स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं के साथ उनका गर्मजोशी से इस्तेकबाल किया। इसके बाद वे हाईवे के रास्ते जारी बाजार पहुंचे, जहां मस्जिद में नमाज़ अदा की। यहां आलम भाई समाजसेवी, सुहेल, साहिल सैफ, रमजान, शिवम वर्मा, मो. फिरोज, प्रदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में हिंदू-मुस्लिम युवाओं ने नम आंखों से उनका स्वागत किया और विदाई दी, जो आपसी भाईचारे की मिसाल बना।
इसके उपरांत मिश्रा बांध पहुंचने पर भी भारी संख्या में लोगों ने हाजी आशिफ अंसारी का तहेदिल से इस्तेकबाल किया और कुछ देर ठहरने का आग्रह किया।बताया गया कि 3 फरवरी 2026 को शब-ए-बारात के पाक और मुकद्दस अवसर पर हाजी आशिफ अंसारी प्रयागराज के खान चौराहा पर रात्रि विश्राम करेंगे। इसके बाद अगले दिन पुनः अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हुए बाराबंकी पहुंचेंगे, जहां कई नामी-गिरामी हस्तियों और राजनेताओं द्वारा उनके सम्मान में भव्य स्वागत किया जाएगा।हाजी आशिफ अंसारी की यह पैदल उमरा यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि इंसानी हिम्मत, सब्र और भाईचारे का जीवंत उदाहरण भी बन रही है।









