कौशाम्बी। लोकसभा के प्रश्नकाल में टेट अनिवार्यता सम्बन्धी प्रश्न का केंद्रीय राज्य शिक्षामंत्री जयंत चौधरी के जवाब और टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि मण्डल से हुई वार्ता में सरकार द्वारा दिये गये शिक्षक हितैषी आश्वासन के विरोधाभासी होने से अधिसूचना पूर्व नियुक्त शिक्षकों की टेट अनिवार्यता के विरोध का आंदोलन फिर से तेजी पकड़ता दिख रहा है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चन्द्र शर्मा के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर टेट अनिवार्यता के विरोध में केंद्रीय राज्य शिक्षामंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंका गया। उसी के क्रम में कौशाम्बी के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह के नेतृत्व में मंझनपुर चौराहे पर विरोध प्रदर्शन कर जयंत चौधरी का पुतला फूंक कर विरोध दर्ज कराया गया।
जिलाध्यक्ष अनिल सिंह ने बताया कि टेट अधिसूचना पूर्व नियुक्त शिक्षकों की टेट अनिवार्यता का ये काला कानून शिक्षक के साथ अन्याय है। ये संविधान निहित समानता और जीवन यापन के कानून का उल्लंघन है। जब नियुक्ति के समय शिक्षक तत्कालीन न्यूनतम अर्हता को पूर्ण कर नियुक्त हुआ है तो उस पर अब नई अर्हता जबरिया क्यों थोपी जा रही है? ये तो बिल्कुल न्यायसंगत और विधिसम्मत नहीं है। परन्तु इस महत्वपूर्ण और गंभीर प्रकरण पर लोकसभा में केंद्रीय राज्य शिक्षामंत्री जयंत चौधरी का गैर शिक्षक हितैषी जवाब उनकी शिक्षकों के प्रति नकारात्मक सोच और मानसिकता का परिचायक है। वर्तमान सरकार की भारत को जगतगुरू बनाने की मुहिम पर कुठाराघात है जिस समाज या राज्य में शिक्षक का सम्मान नहीं है उस समाज और राज्य का उत्थान संभव ही नहीं है। इतिहास रहा है जब जब शिक्षकों ने चाहा है तब तब परिवर्तन हुआ है।
इस विरोध प्रदर्शन में जिलामंत्री रामबाबू दिवाकर, ईश्वर शरण सिंह, भोलानाथ चौधरी, विनय सिंह, अशोक द्विवेदी, आलोक सोनी, अरुण गोविल सिंह, विनोद सिंह, अफरोज आलम, अतमम अली, रहमत अली, भीम प्रकाश, जैनेन्द्र आदि पदाधिकारियों सहित जनपद के सैकड़ों शिक्षकों ने प्रतिभाग किया।









