– न्यायालय आदेश की अनदेखी पर मंडलायुक्त सख्त
अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। कर्वी तहसील में सरकारी जमीनों और निजी प्लाटों पर कब्जे के मामलों को लेकर तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी एक बार फिर विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल में सरकारी जमीनों, तालाबों और खेल मैदानों पर कब्जे की घटनाएं लगातार सामने आती रहीं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अब न्यायालय के आदेश का पालन न करने के मामले में मंडलायुक्त ने कड़ा रुख अपनाया है।
बताया जा रहा है कि जब से तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी ने कर्वी तहसील का चार्ज संभाला, तब से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं। कई मामलों में सोशल मीडिया पर भी खबरें सामने आईं, जिनमें तालाब की जमीन और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर कब्जे की बात कही गई। आरोप है कि कर्वी तहसील क्षेत्र के अकबरपुर (ब) स्थित एक तालाब के भीटे पर भी कुछ दबंगों ने कब्जा कर लिया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इसी बीच कर्वी क्षेत्र के लक्ष्मणपुरी निवासी भास्कर उपाध्याय ने मंडलायुक्त को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में उन्होंने भैरो पागा क्षेत्र में 33×80 फीट का एक प्लाट खरीदा था। आरोप है कि 24 जून को जनपद कौशांबी निवासी धीरेन्द्र सिंह, सविता सिंह समेत करीब 20 लोगों ने उनके प्लाट पर अवैध रूप से दीवार खड़ी करने का प्रयास किया। सूचना पर पुलिस की मदद से निर्माण कार्य रुकवाया गया और मामला सिविल न्यायालय में पहुंच गया।
सिविल न्यायालय ने 5 जुलाई 2025 को इस मामले में आदेश पारित किया था, लेकिन आरोप है कि उसके बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं कराया गया। शिकायत मिलने पर मंडलायुक्त के निर्देश पर नवंबर में अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे स्वप्निल यादव की अध्यक्षता में संयुक्त जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि विपक्षी पक्ष की जमीन की चौहद्दी प्लाट से मेल नहीं खाती है। साथ ही यह भी पता चला कि जिस व्यक्ति से विपक्षी ने जमीन खरीदी थी, वह पहले ही नोटरी के माध्यम से वही जमीन अन्य लोगों को बेच चुका है और वहां लोग काबिज हैं।
जांच रिपोर्ट के बाद मंडलायुक्त अजीत कुमार ने 29 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी पुलकित गर्ग को पत्र लिखकर न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए थे। मंडलायुक्त ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि 25 दिसंबर को भी इस संबंध में निर्देश भेजे गए थे। इसके बाद फरवरी माह में उन्होंने दूरभाष पर कर्वी तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी से बात कर न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने को कहा था, लेकिन इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं कराया गया।
मंडलायुक्त ने अब एक बार फिर जिलाधिकारी को पत्र भेजकर न्यायालय के आदेश का तत्काल अनुपालन कराने तथा लापरवाही बरतने पर तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर और गंभीर होता नजर आ रहा है।
– सितंबर 2025 में हो चुका है तबादला
कर्वी तहसील में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के सामने आने के बाद सितंबर 2025 में तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी का तबादला कर्वी से मऊ कर दिया गया था। दरअसल 23 सितंबर को एंटी करप्शन टीम ने कर्वी तहसील में छापा मारकर तहसीलदार के स्टेनो राहुल और चपरासी इस्तेयाक को हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर छह हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।
हालांकि तबादले के कई महीने बीत जाने के बाद भी तहसीलदार चंद्रकांत तिवारी ने अब तक मऊ में पदभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में न्यायालय के आदेश की अनदेखी और लगातार सामने आ रहे आरोपों के बीच अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।









