अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। यमुना नदी में संचालित बालू खदानें अब जिले के तिरहार क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनती जा रही हैं। पिछले आठ वर्षों से यहां के लोगों को सुगम आवागमन तक नसीब नहीं हुआ है। धूल और खराब सड़कों की वजह से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाएं भी पूरी तरह चरमरा गई हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि कई बार एंबुलेंस तक गांवों में नहीं पहुंच पाती।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार धरना-प्रदर्शन करने के बावजूद न तो सरकार और न ही जिला प्रशासन ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान दिया। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि गांवों में बेटियों की शादियां तक प्रभावित होने लगी हैं।
– हजारों ट्रकों का दबाव, सड़कें बनी जानलेवा
सरधुआ थाना क्षेत्र के चांदी, धुमाई और धौरहरा इलाकों में यमुना नदी से बड़े पैमाने पर बालू खनन हो रहा है। यहां से बालू ढोने के लिए हजारों की संख्या में ट्रकों का आवागमन होता है, जिससे क्षेत्र की सड़कें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। सड़कों पर उड़ती धूल से आसपास की फसलें नष्ट हो रही हैं और प्रदूषण भी बढ़ गया है।
– ग्रामीणों की पीड़ा: सड़क में गड्ढा या गड्ढे में सड़क
ग्रामीण बृजमोहन द्विवेदी का कहना है कि खनन शुरू होने के बाद से सड़कों की हालत बद से बदतर हो गई है। उन्होंने बताया कि अब यह पहचानना मुश्किल है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां। बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
वहीं बरद्वारा गांव के किसान अमर सिंह बताते हैं कि ओवरलोड ट्रकों के कारण धूल इतनी अधिक उड़ती है कि फसलें पूरी तरह ढक जाती हैं और बर्बाद हो जाती हैं। उन्होंने सरकार से सड़कों के तत्काल सुधार की मांग की है।
– आठ वर्षों से परेशानी, समाधान नहीं
धुमाई गांव के पप्पू द्विवेदी के अनुसार, पिछले आठ वर्षों से बालू खनन हो रहा है और सरकार को इससे अरबों रुपये का राजस्व मिल रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को सिर्फ बदहाल सड़कें और परेशानियां ही मिली हैं। उन्होंने बताया कि कई बार धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि खराब सड़कों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बार गर्भवती महिलाओं को ट्रैक्टर से अस्पताल ले जाना पड़ता है और रास्ते में ही प्रसव हो जाता है।
– एनजीटी नियमों की अनदेखी का आरोप
ग्रामीणों ने खनन ठेकेदारों पर मनमानी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यमुना नदी की जलधारा से भारी मशीनों के जरिए बालू निकाली जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है। इससे जलीय जीवों को भी नुकसान पहुंच रहा है।
– प्रशासन पर उदासीनता के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे बैठा है। कई बार शिकायत करने और प्रदर्शन के बावजूद अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
बालू खनन से जहां सरकार को राजस्व मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का जीवन संकट में है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहता है और कब इन ग्रामीणों को उनकी मूलभूत समस्याओं से राहत मिलती है।









