अश्विनी श्रीवास्तव
चित्रकूट। धर्मनगरी चित्रकूट में आयोजित चर्चित “22 लाख दीपदान” अब आस्था से ज्यादा विवाद का केंद्र बनता जा रहा है। पहले जहां इस आयोजन ने रिकॉर्ड और धार्मिक उत्साह को लेकर सुर्खियां बटोरीं, वहीं अब इसके आंकड़ों की सत्यता, पारदर्शिता और प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला अब सियासी रंग भी ले चुका है।
सबसे पहले इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा ने भगवान कामतानाथ स्वामी को पत्र लिखकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने “22 लाख दीप” के दावे को भ्रामक बताते हुए इसे आस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया। मिश्रा ने साफ कहा कि इस तरह के दावों से न केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है, बल्कि आयोजन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब अनुज यादव, जो समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दीपदान के नाम पर ग्राम पंचायतों के सचिवों और प्रधानों से जबरन दो-दो हजार रुपये वसूले गए। यादव ने तंज कसते हुए कहा, “वसूली के बावजूद भी 22 लाख का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया, जो बेहद शर्मनाक है।”
इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी नाराजगी साफ नजर आ रही है। कई लोगों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों को अब “टारगेट” और “रिकॉर्ड बनाने की होड़” में बदल दिया गया है, जिससे उनकी पवित्रता प्रभावित हो रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि वाकई वसूली और आंकड़ों में हेरफेर हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका क्या रही?
जनता की मांग है कि प्रशासन इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़े और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। लोगों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों में पारदर्शिता और ईमानदारी सर्वोपरि होती है। यदि ऐसे आयोजनों में ही अनियमितताएं सामने आएंगी, तो इससे आस्था पर सीधा आघात पहुंचेगा।
फिलहाल चित्रकूट में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है—क्या इन आरोपों की गंभीरता से जांच होगी या फिर यह मामला भी अन्य विवादों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? जनता जवाब का इंतजार कर रही है।









