पान मसाला–गुटखा की काला बाजारी चरम पर, प्रशासन आखिर कब जागेगा?

 

खुलेआम दुकानदार ब्लैक में बेच रहे सामान, जिम्मेदार विभाग मौन

 

अश्विनी श्रीवास्तव

चित्रकूट। जनपद में इन दिनों पान मसाला और गुटखा की काला बाजारी अपने चरम पर पहुंच गई है। हालात यह हैं कि दुकानदार खुलेआम प्रतिबंधित या सीमित आपूर्ति वाले उत्पादों को ब्लैक में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। इससे जहां आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है, वहीं सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

 

स्थानीय बाजारों में बड़ी मात्रा में पुराना स्टॉक नए रेट के नाम पर बेचा जा रहा है। दुकानदार मनमाने तरीके से कीमतें तय कर ग्राहकों से वसूली कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस खेल में लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का अवैध मुनाफा कमाया जा रहा है।

ग्राहकों की मजबूरी का फायदा

गुटखा और पान मसाला के शौकीनों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए दुकानदार निर्धारित मूल्य से कई गुना ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। आम उपभोक्ता विरोध भी नहीं कर पा रहे, क्योंकि उन्हें सामान कहीं और आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा।

 

इस अवैध कारोबार से सरकार को लाखों रुपये के टैक्स का चूना लग रहा है। बिना बिल के बिक्री और स्टॉक छिपाकर रखने जैसी गतिविधियां खुलेआम जारी हैं, जिससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन इस पूरे मामले में अब तक खामोश क्यों है? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह खामोशी प्रशासन की मिलीभगत मानी जाएगी।

 

जनता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल छापेमारी कर दोषी दुकानदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि इस अवैध वसूली पर रोक लग सके और आम लोगों को राहत मिल सके।

Up Fight Times
Author: Up Fight Times

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