श्रीप्रकाश शुक्ला: यूपी के अपराध का वो दौर जिसने STF को जन्म दिया

 

उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में ‘श्रीप्रकाश शुक्ला’ एक ऐसा नाम है, जिसने महज 25 साल की उम्र में पूरे सरकारी तंत्र की नींद उड़ा दी थी। गोरखपुर के एक साधारण परिवार और कुश्ती के अखाड़ों से निकला यह युवक देखते ही देखते यूपी का सबसे बड़ा ‘कॉन्ट्रैक्ट किलर’ बन गया। उसके जुर्म का सफर 1993 में शुरू हुआ, जब उसने अपनी बहन से छेड़छाड़ करने वाले राकेश तिवारी की हत्या कर दी। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह बैंकॉक भाग गया, लेकिन वापस लौटकर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वह उन शुरुआती अपराधियों में से था जिसने यूपी में AK-47 का बेखौफ इस्तेमाल किया। उसने बिहार के बाहुबली सूरजभान सिंह के साथ मिलकर रेलवे ठेकों, अपहरण और रंगदारी का एक बड़ा सिंडिकेट खड़ा किया। श्रीप्रकाश ने सबसे बड़ी सनसनी 13 जून 1998 को फैलाई, जब उसने बिहार के तत्कालीन मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या पटना के IGIMS अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच कर दी।

शुक्ला का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया था कि उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या के लिए 6 करोड़ रुपये की सुपारी ले ली थी। इस अभूतपूर्व खतरे को देखते हुए 4 मई 1998 को यूपी पुलिस की एक विशेष इकाई STF (Special Task Force) का गठन किया गया। STF ने उस दौर में नई तकनीक—’इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस’ और ‘मोबाइल ट्रैकिंग’—का पहली बार बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया।

22 सितंबर 1998 को गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके में एसटीएफ ने श्रीप्रकाश शुक्ला को घेर लिया। दोनों तरफ से हुई भीषण गोलीबारी में श्रीप्रकाश मारा गया। यह यूपी एसटीएफ का पहला बड़ा एनकाउंटर था, जिसने संगठित अपराध के एक खौफनाक अध्याय का अंत किया और राजनीति व जुर्म के गठजोड़ को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।

 

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Author: Up Fight Times

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